बैंक पीओ और क्लर्क में क्या अंतर है ?

नमस्कार दोस्तों! careerinhindi.com में आपका स्वागत है। हमारे आज के इस पोस्ट “बैंक पीओ और क्लर्क में क्या अंतर है ?” के जरिये हम आपको बतायेंगे कि बैंक पीओ (प्रोबेसनरी ऑफ़िसर) तथा बैंक क्लर्क में क्या अंतर है।  तो चलिए बिना समय गवाए जानते हैं दोनों के बारे में।

बैंक पीओ और क्लर्क में क्या अंतर है ?

बैंक पीओ और क्लर्क में क्या अंतर है ?
बैंक पीओ और क्लर्क में क्या अंतर है ?

बैंक क्लर्क क्या होता है ?

सिर्फ़ बैंकिंग ही नहीं किसी भी System में दो व्यक्तियों का अहम रोल होता है एक क्लर्क और दूसरा अधिकारी। जब भी आप बैंक में जाते है तो आपको सबसे पहले क्या दिखाई देता है ? एक काउंटर जहाँ बैंक का एक कर्मचारी बैठा होता है जो आपके द्वारा दिए गए काम को पूरा करता हैं जैसे नगद रूपये जमा करना, नगद रूपये निकलना, पासबुक की एंट्री करवाना, RTGS-NEFT करना आपका चेक जमा करना आदि ये कार्य जो करता है वह लिपिक यानि क्लर्क होता है | जो कार्य क्लर्क द्वारा किया जाता हैं वह अधिकारी के पास पास होने जाता हैं |

अधिक जानने के लिए यह पोस्ट पढ़े : बैंक क्लर्क क्या होता है ?

बैंक पीओ क्या होता है ?

पीओ यानी प्रोबसनरी ऑफ़िसर जो एक अधिकारी वर्ग के रूप में बैंक में अपना कार्य शुरू करता हैं, चूँकि शुरुआत के 1 से 2 वर्ष तक ये परिवीक्षा अवधि में रहते हैं इसलिए इन्हें परिविक्षा अधिकारी कहा जाता हैं। किसी भी विभाग के अधिकारी की ही तरह बैंक अधिकारी की भी जिम्मेदारियाँ अधिक रहती है उसे ही कुछ अहम फ़ैसले लेना होते है जैसे किसे लोन देना किसे नहीं आदि ।

बैंक क्लर्क/पीओ के नियुक्ति की क्या प्रक्रिया है ?

हमारे देश में पब्लिक सेक्टर बैंकों भर्ती के लिए एक बोर्ड हैं जिसका नाम है IBPS (इन्स्टिटूट ऑफ़ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन) जो प्रतिवर्ष बैंकों में क्लर्क एवं अधिकारी की भर्ती के लिए विज्ञप्ति निकालती हैं जिसमें एक प्री एवं मेन दो परीक्षाएँ एवं उसके बाद इंटरव्यू एवं ग्रूप डिस्कसन आदि की प्रक्रिया से गुजरने के बाद बैंकों में नौकरी मिलती है।

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शैक्षणिक एवं अन्य योग्यता तथा वेतन

शैक्षणिक योग्यता : आप किसी भी विषय में अपना ग्रेजुएशन पूरा करके बैंक क्लर्क एवं पीओ  की एग्जाम दे सकते हैं, लेकिन पीओ के लिए आवेदन करने के लिए आपको ग्रैजूएशन में 60% अंक होना अनिवार्य है | इसके आलावा आप जिस राज्य से परीक्षा दे रहें हैं आपको वहां की लोकल भाषा (हिन्दी, गुजरती, मराठी) साथ ही कम्प्यूटर का भी अच्छा ज्ञान होना ज़रूरी है । हैं |

उम्र सीमा : बैंक क्लर्क के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो आपकी age 20-28 वर्ष होना चाहिए, वहीं पीओ के लिए 20 से 30 वर्ष के छात्र आवेदन कर सकते हैं।  | age limit में OBC को 3 वर्ष ST, SC को 5 वर्ष एवं विकलांग को 10 वर्ष की छुट हैं | इसके आलावा पूर्व सैनिक, विधवा आदि के लिए छुट का प्रावधान हैं |

वेतन : शुरुआत में एक बैंक क्लर्क का वेतन 21,000 बेसिक एवं अन्य भत्ते होता है लेकिन अब आईबीए ने बैंक कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी कर दी है तो अब बैंक क्लर्क का वेतन 35,000 एवं अन्य भत्ते एवं अधिकारी (पीओ) का शुरुआती वेतन तक़रीबन 50,000 एवं अन्य भत्ते होता है।

बैंकिंग में करियर एवं पद्दोन्नती (प्रमोशन)

यदि कोई व्यक्ति क्लर्क से बैंक में शुरुआत करत हैं तो वह पाँच वर्ष में पदोन्नति के लिए योग्य होता हैं हालाँकि कुछ परीक्षाएँ जैसे JAIIB एवं CAIIB देकर कोई क्लर्क 2 से 3 वर्ष में प्रमोट हो सकता है, क्लेरिकल से पद्दोन्नती इस प्रकार होती है।

  • क्लर्क
  • अधिकारी (सहायक प्रबंधक) (स्केल 1)
  • प्रबंधक – Manager (स्केल 2)
  • वरिष्ठ प्रबंधक Senior Manager (स्केल 3)
  • मुख्य प्रबंधक Chief Manager (स्केल 4)
  • सहायक महा प्रबंधक Assistant General Manager(स्केल 5)
  • उप महा प्रबंधक Deputy Gen Manager (स्केल 6)
  • महा प्रबंधक General Manager (स्केल 7)

इसके बाद गवर्न्मेंट आपको आपके कार्य एवं अनुभव के आधार पर किसी बैंक का ईडी या सीएमडी बना देती है जो कि आप स्वयं किसी परीक्षा देकर नहीं बन सकते।

अधिकारी (PO) के लिए भी विकास दर यही होती है बस अंतर इतना होता है कि वे सीधे  स्केल 1 से आगे का सफ़र तय करते हैं एवं क्लेरिकल पहले स्केल 1 एवं फिर आगे का सफ़र तय करता है।  नोट : यदि कोई क्लर्क प्रमोट होता है तो वह पीओ नहीं सहायक प्रबंधक या अधिकारी कहलाता है ।

हमें उम्मीद है कि इस पोस्ट “बैंक पीओ और क्लर्क में क्या अंतर है ?” के जरिये आपको बैंक में नौकरी के लिए आवेदन करने में मदद मिलेगी। इसी तरह की अन्य करियर संबंधित जानकारी पढ़ने के लिए  हमें  सोशल  मीडिया पर फ़ॉलो करें  Facebook – Youtube  इस पोस्ट से जुड़ी किसी भी अन्य जानकारी के लिए आप हमसे कमेंट के माध्यम से संपर्क कर सकते है । धन्यवाद !