न्यायाधीश (जज) कैसे बनें ?

नमस्कार दोस्तों! careerinhindi.com में आपका स्वागत है। अगर आप भारत में न्यायाधीश (जज) के तौर पर अपना करियर बनाना चाहते है तो ये पोस्ट आपके लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है। हमारे आज के इस पोस्ट के जरिये हम आपको बतायेंगे कि एलएलबी की डिग्री हासिल करने के उपरांत एक जज के रूप में आप अपना करियर कैसे बना सकते है। पूरी जानकारी के लिए पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़े । तो आयिए न्यायाधीश बनने की चयन प्रक्रिया के बारें में थोडा विस्तार से जानते हैं।

न्यायाधीश (जज) कैसे बनें ?

न्यायाधीश (जज) कैसे बनें ?
न्यायाधीश (जज) कैसे बनें ?

न्यायाधीश (जज) कौन होते है?

न्यायाधीश वह व्यक्ति होता है जो किसी न्यायालय में निर्णय लेता है। भारतीय न्यायिक व्यवस्था में, जज ही अदालत में होने वाली कार्यवाही की अध्यक्षता करने के लिए जिम्मेदार होते है। एक अदालत में न्यायाधीश सर्वोच्च अधिकार रखते है तथा उनका निर्णय अंतिम एवं मान्य होता है।

जज बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता क्या है ?

भारत में न्यायिक व्यवस्था में जज बनने के लिए सबसे पहले आपके पास कानून की डिग्री होनी चाहिए। इसके बाद आपका अधिवक्ता होना भी अनिवार्य है। जिसके लिए आपको एलएलबी पाठ्यक्रम के लिए खुद को नामांकित करना होगा। यह आमतौर पर एक 3 साल का कार्यक्रम है जहां छात्रों को कानून का अभ्यास करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है । इस पाठ्यक्रम के लिए अधिकांश प्रवेश राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से होते हैं। दिल्ली के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा को अखिल भारतीय विधि प्रवेश परीक्षा (AILET) कहा जाता है। अन्य सभी राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालयों के लिए प्रवेश सामान्य कानून प्रवेश परीक्षा (CLAT) के माध्यम से होते हैं।

जज बनने की चयन प्रक्रिया क्या है ?

जैसा कि मैंने पहले बताया, जज बनने के लिए आवेदन करने के लिए न्यूनतम योग्यता एलएलबी डिग्री है। न्यायिक सेवा परीक्षा के तीन चरण हैं। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। सभी अभ्यर्थी जो प्रारंभिक परीक्षा पास करते हैं, उन्हें मुख्य परीक्षा के लिए आमंत्रित किया जाता है। उच्च न्यायिक सेवा परीक्षा के मुख्य चरण में चार पेपर होते हैं। सभी पेपर सब्जेक्टिव होते हैं। न्यायिक सेवा परीक्षा का अंतिम चरण साक्षात्कार चरण है। यहां आपकी अभिरुचि, रुचि और व्यक्तित्व को आंका जाता है। यदि उम्मीदवार परीक्षा के माध्यम से उत्तीर्ण होता है, तो उसे मजिस्ट्रेट की भूमिका दी जाती है। बाद में, वे वरिष्ठता के आधार पर नागरिक न्यायाधीश, न्यायिक न्यायाधीश और वरिष्ठ न्यायाधीश बनने की सीढ़ी चढ़ते हैं। एक बार जब आप इस पात्रता मानदंड को पूरा कर लेते हैं, तो उच्च-स्तरीय अदालतों के लिए अनंतिम सिविल सेवा-न्यायिक परीक्षा (न्यायिक सेवा परीक्षा) का प्रयास करें।

भारत में न्यायाधीश की कितनी सैलरी है ?

भारत के मुख्य न्यायाधीश का नया वेतन अब वर्तमान में एक लाख रुपये से बढ़कर 2.8 लाख रुपये प्रति माह हो गया है। इसी तरह, कानून मंत्रालय द्वारा अधिसूचित अधिनियम के अनुसार उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश का वेतन 90,000 रुपये प्रति माह है ।

हमें उम्मीद है कि आप लेख का आनंद ले रहे होंगे तथा इस पोस्ट के जरिये आपके मन में न्यायाधीश बनने से सम्बंधित जो भी दुविधाएं थी, उससे सम्बंधित सारे सवालों के जवाब मिल गये होंगे। इसी तरह की अन्य करियर संबंधित जानकारी पढ़ने के लिए  हमें  सोशल  मीडिया पर फ़ॉलो करें  Facebook – Youtube इस पोस्ट से जुड़ी किसी भी अन्य जानकारी के लिए आप हमसे कमेंट के माध्यम से संपर्क कर सकते है। धन्यवाद !